सऊदी शासन द्वारा हाल में किए गए कुछ गोपीनीय फैक्सों से एक बहुत बड़ा रहस्योद्घाटन हुआ है।
प्राप्त सूचना के अनुसार सऊदी अरब और क़तर के शासक हालिया कुछ वर्षों में लगातार यमन में जातीय हिंसा और साम्प्रदायिकता द्वारा अराजकता फैलाने के प्रयास में हैं। अल-आलम टीवी के अनुसार हाल ही में सामने आए गोपीनीय फैक्सों के एक दस्तावेज़ में सऊदी अरब में मंत्री परिषद समिति के उपाध्यक्ष अली बिन अब्दुल अज़ीज़ अल-ख़ुज़ैरी ने यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन और ज़ैदी समुदाय के बीच मतभेद उत्पन करने के प्रयासों पर बल दिया है।
इनमें से एक फैक्स में ख़ुरैज़ी ने इस बात पर बल दिया है कि यमन में पैदा किये जाने वाले जातीय मतभेद इस तरह के हों कि लोगों को यह न पता चले कि यह युद्ध शीया और सुन्नी क़बीलों के बीच है और इस षड्यंत्र में सऊदी अरब का हाथ है। ख़ुरैज़ी के एक दूसरे फैक्स में, जिसे सऊदी अरब के उप गृह मंत्री को भेजा गया था, लिखा है कि यह वे सूचनाएं हैं जो सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय को यमन के जौफ़ क्षेत्र में हौसी विरोधी क़बीलों से प्राप्त हुई हैं।
फैक्स में ख़ुरैज़ी ने सऊदी अरब के उप गृह मंत्री से कहा है कि ऐसे सभी क़बीलों से संपर्क किया जाए और उनकी अधिक से अधिक सहायाता किया जाए ताकि वे हौसियों के मुक़ाबले के लिए तैयार हो सकें। सुरक्षा मामले में सऊदी अरब के उप गृह मंत्री को भेजे अपने एक फैक्स में ख़ुरैज़ी ने क़तर द्वारा यमन में आरजकता फैलाए जाने से पर्दा उठाया है। ख़ुरैज़ी द्वारा भेजे गए इस फैक्स के अनुसार क़तर सरकार यमन में जातीय हिंसा और साम्प्रदायिकता फैलाने के लिए मोटी रक़म खर्च कर रहा है और उसने लगभाग 25 करोड़ डॉलर इसी काम से विशेष किये हैं।
एक फैक्स में यमन में सऊदी अरब के राजदूत अली बिन मोहम्मद अल-हमदान द्वारा यमन के आंतेरिक मामलों में हस्ताक्षेप की बात सामने आई है। इसी तरह सामने आए सऊदी अरब शासन के गोपनीय फैक्सों ने बहुत से रहस्यों से पर्दा उठाया है।